
आज परिमल जी से उनकी पहली विदेश यात्रा के कुछ रोचक संस्मरण जानने को मिले. डॉ. महेश परिमल जी के शब्दों में "आप अपने लक्ष्य की दिशा में एक कदम तो उठाइए, बाकि की मंजिल तो तय हो ही जाती है."
महेश परिमल जी ने कभी अपने मन में अमेरिका यात्रा का स्वप्न देखा था वो आज पूरा हो गया.

मंजिल मिल ही जाती है उन्हें जिन्होंने मंजिलों की और कदम बढ़ा दिए, गुमराह तो वो हैं जो घर से निकले ही नहीं.
डॉ. महेश परिमल जी के जीवन संघर्ष, लेखन यात्रा, अमरीका यात्रा और भी कई अनुभव हम यहाँ publish करने का प्रयास करेंगे.
अमेरिका में हिंदी भाषा का बहुत अधिक सम्मान और महत्व है. ये बात परिमल जी ने अपने यात्रा संस्मरणों में बताई. डॉ. महेश परिमल जी ने वहां के जो अनुभव बताये जल्दी ही उनकी अमेरिका यात्रा के संस्मरण हम उनके ब्लॉग के साथ साथ यहाँ पढने को मिलेंगे. परिमल जी की ये यात्रा एक अमेरिकी विश्वविद्यालय के सौजन्य से संभव हो पाई. हम उम्मीद करते हैं कि जल्दी ही हमारे पाठकों के लिए डॉ. महेश परिमल जी के यात्रा अनुभव, अमेरिकी शिक्षा पद्धति, अमेरिकी संस्कृति और U.S.A. के कुछ ख़ास Teachers और Motivational Persons के बारे में पढने को मिलेगा.
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